बिहार। कोसी नदी पर रेल पुल तैयार हो गया है। इस वर्ष अक्टूबर माह से इस रेल पुल पर ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ हो जायेगा। 86 वर्ष बाद निर्मली (दरभंगा), भपटियाही (सुपौल) के साथ पूरे विश्व के लोग इस पुल पर ट्रेन को चलते देखेंगे। 1934 में आये भूकंप की वजह से कोसी नदी पर रेल पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, तबसे यह रेल मार्ग बंद था। इस कारण उत्तर और पूर्व बिहार के बीच का रेल संपर्क टूट गया था। वर्ष 1999 में केन्द्र में एनडीए की सरकार आने के बाद भारत में भू-तल परिवहन के क्षेत्र में एक क्रांति आई थी। स्वर्णिम चतुर्भुज का निर्माण हुआ और इनको जोड़ने के लिए कई सड़कें बनीं। उसी क्रम में इस्ट-वेस्ट कोरिडोर के निर्माण को भी अनुमति मिली। 6 जून, 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी पर एक महासेतु और उसके समानान्तर एक रेल पुल का शिलान्यास किया था। फरवरी, 2012 में कोसी महासेतु का उद्घाटन तो हो गया लेकिन रेल पुल का कार्य लंबित रह गया। अब जाकर यह रेल पुल बनकर तैयार हुआ है।
पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि नये कोसी रेल पुल की लंबाई 1.88 किलोमीटर है। इसमें 45.7 मीटर लंबाई के ओपनवेब गार्डर वाले 39 स्पैन लगे हैं। कोसी नदी पर बने रेल पुल का ट्रेन ट्रायल कर लिया गया है। इसी वर्ष अक्टूबर से इस नये रेल मार्ग पर रेलों का परिचालन प्रारंभ हो जाने की उम्मीद है। यह पुल दरभंगा के निर्मली से सुपौल के भपटियाही के बीच बना है। सकरी-झंझारपुर-निर्मली-सरायगढ़-सहरसा आमान परिवत्र्तन योजना के तहत नये कोसी पुल का रेलवे ट्रैक से अब सरायगढ़ होते हुए सहरसा से जुड़ाव हो गया है। सहरसा-सुपौल रेलखंड पर पहले से ट्रेनों का परिचालन होता रहा है। सुपौल-सरायगढ़ रेलखंड भी एक महीने में परिचालन के लिए खोल दिया गया है।

KOSI RAIL BRIJE
इस नये पुल का स्ट्रक्चर एमबीजी लोडिंग क्षमता के अनुरूप डिजायन किया गया है। सकरी से झंझारपुर तक रेल लाईन पर ट्रेनें लाॅकडाउन के पहले तक चल रही थी। निर्मली से आसनपुर पोहा तक नई लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आसनपुर निर्मली ब्रिज से सरायगढ़ तक ट्रायल हो चुका है। सीआरएस निरीक्षण होना बाकी है।
इस पुल के बन जाने से 298 किलोमीटर की दूरी मात्र 22 किलोमीटर में सिमट जायेगी। रेल मार्ग आम आदमी के लिए ज्यादा सुविधाजनक होता है। कम पैसे में शीघ्रता से गंतव्य तक पहुंचा जा सकता है। वैसे तो कोसी महासेतु (सड़क पुल) पर वाहनों का परिचालन 2012 से प्रारंभ है लेकिन, रेल पुल बन जाने के बाद जनता के आवागमन और सामान के ढुलाई के लिए ज्यादा आसानी होगी। इस रेल पुल को लेकर लंबे समय से इस क्षेत्र में आंदोलन चलता रहा। केन्द्र में एनडीए सरकार के आने के बाद इस विषय को गंभीरता से लिया गया। मिथिला क्षेत्र में रेलों के विकास के लिए लगातार कोशिश हुई। 851.44 करोड़ रूपये सकरी-झंझारपुर-निर्मली-सरायगढ़-सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड पर खर्च किये गये। इस पुल के बन जाने से बिहार की लगभग 5 करोड़ की आबादी को सीधा लाभ होगा।

– संजीव कुमार

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