कहते हैं डूबते को तिनका सहारा। बिहार के बाढ़ में ऐसे कई दृश्य सामने आ रहे हैं जहां लोग संसाधन के अभाव में जुगाड़ से काम चल रहे हैं। ऐसा ही एक वाकया समातीपुर के कल्याणपुर प्रखंड में देखने को मिला। यहां बागमती से आई बाढ़ के कारण पूरा गांव फंस हुआ था। बाहर निकलने का कोई रकस्त नहीं था। ऐसे में पीडि़तों की मदद के लिए प्रखंड के पूसा सैदपुर निवासी अमन पांडे ने जुगाड़ से मोटरबोट बना डाली। जुगाड़ से बनी इसे बनाने में पुरानी बाइक और दो ड्रम सहित अन्य सामान का इस्तेमाल किया गया था। यह मोटरबोट एक लीटर पेट्रोल में 20 मिनट या एक किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इस नाव पर एक साथ चार लोग सवार हो सकते हैं।
जयपुर के निम्स से दो साल पहले बीटेक किए अमन पूसा में खेती संबंधी यंत्र बनाने का कारखाना चलाते हैं। गांव में आई बाढ़ में नाव की किल्लत देख उन्होंने अपने कारखाने में मोटरबोट बनाने का निर्णय लिया। काफी सोच-विचार के बाद घर में पड़ी पुरानी मोटरसाइकिल, ड्रेनेज पाइप, प्लास्टिक के दो ड्रम, टरबाइन के लिए पंखे का इस्तेमाल किया। महज तीन दिन में ही इसका निर्माण कर डाला। इस जुगाड़ की नाव पर कुल 20 हजार रुपये खर्च हुए। बोट को चलने के लिए कम से कम तीन फीट की गहराई तक पानी चाहिए। निर्माण के बाद इसका कई चरणों में परीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से उसपर ट्यूब भी रखा जाता है। सभी मानकों पर जब उनकी बोट खरी उतरी तो इससे बाढ़ पीडि़तों को बिना शुल्क निकालने का काम शुरू किया। अब तक तकरीबन 150 लोगों को निकाल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा चुके हैं।

—– संजीव कुमार

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