जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में नकाबपोश हमलावरों के हमले के बाद पहली बार जेएनयू के प्रोफेसर की प्रतिक्रिया सामने आई है। अर्थशास्त्र की प्रोफेसर इंद्राणी रॉय मुखर्जी ने अपने फेसबुक पेज पर इस हमले को लेकर काफी कुछ लिखा है।
प्रोफेसर इंद्राणी ने लिखा है, जेएनयू एक बार फिर सुर्खियों में है। उन्होंने मीडिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब जेएनयू की वेबसाइट हैक की गई तब मीडिया कहां था। जब नकाबपोशों द्वारा जेएनयू में तोड़फोड़ की गई, जब जेएनयू के मेन सर्वर रूम को तोड़ा गया। जब लाखों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तब मीडिया कहां था।
“ये वो जघन्य अपराध है जो मैंने सभी छात्र संगठनों से सुना था। ये अविश्वसनीय है कि हमारे कुछ छात्र आतंकवादियों की तरह अपना चेहरा छुपा कर आए और केंद्रीय विश्वविद्यालय की संपत्ति जो कि उनकी अपनी संपत्ति है उसे नष्ट कर दिया। इस हिंसा पर जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन निंदा करने की बजाय चुप रही, लेकिन फिर भी उसी एसोसिएशन में से कुछ टीचर्स हैरान थे कि पुलिस को क्यों नहीं बुलाया गया। उन नकाबपोशों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जिन्होंने हिंसा की। हमने सर्वर रूम की हालत देखी सबकुछ टूटा हुआ था। अभी भी पंजीकरण शुरू नहीं हुआ है। हमें पता चला कि जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने हमले का विरोध किया। मैंने जिज्ञासा के साथ विरोध करने वाले एक छात्र से पूछा जिसे मैंने पढ़ाया है कि आप लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में बात करते हैं, मारपीट का विरोध करते हैं लेकिन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ क्यों नहीं बोलते हो। तो उसने कहा, ये हिंसा कुछ उपद्रवी छात्रों ने की है जो हमारे कंट्रोल में नहीं है। फिर मैंने पूछा कि आप मारपीट का विरोध क्यों करते हो। आपको नहीं लगता कि ऐसा करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।”
“बहुत सारी चीजों के जवाब नहीं हैं। 2 महीने के संघर्ष ने बीपीएल छात्रों के लिए हॉस्टल का किराया कम करवा दिया, लेकिन पता नहीं छात्र क्यों जश्न नहीं मना रहे हैं। वे इस बंद को अभी भी क्यों जारी रखना चाहते हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि वे वापस पहले के दिन चाहते हैं। कुछ कहते हैं कि उनकी अभी कई मांगें हैं, कुछ शंका-आशंका में हैं, लेकिन कुछ छात्र दबी जुबान में कहते हैं कि वे इस आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं क्योंकि इसके पीछे कुछ एक का निजी हित है।”
“प्रोफेसर इंद्राणी ने लिखा है, हम असहाय हैं। हमें अपनी ही दफ्तर से निकाल दिया गया है। हम हर मुसीबत से लड़ रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी और दोबारा पहले जैसे शांति का माहौल होगा। हम में से कुछ इन दिनों हताश हैं और जेएनयू के गेट को बंद करने वाले छात्रों से विनती कर रहे हैं कि हमें सिर्फ पांच मिनट के लिए एक बार अपने दफ्तर जाने दो ताकि जरूरी दस्तावेज ले सकें जैसे कि किताबें और हार्ड डिस्क बगैराह। कई बार हमें कड़े शब्दों को सुनना पड़ता है। लोकतांत्रिक जगह में घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए शिक्षकों के पास इन दिनों कोई मंच नहीं है। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन के लिए ये चिंता का विषय नहीं है, लेकिन हम अक्सर जेएनयू में लोकतांत्रिक स्थान के बारे में बहस करते हैं।”

कृपया इसे पढ़े –

– https://www.facebook.com/indrani.roychowdhyry/posts/2656276201084877

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