शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण करना है। समाज और देश के विकास के लिए संस्कारवान होना आवश्यक  है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, सहनशीलता, समझदारी, सकारात्मक सोच, एकात्मता और आशावादी होना आवश्यक है। तनाव से अनेक बिमारियाँ होती है। अच्छा देखें, अच्छा सुनें और मृदुभाषी बनें। उक्त बातें वरिष्ठ माध्यमिक सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर में ”जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व“ विषय पर ब्रह्माकुमारी के अन्र्तराष्ट्रीय मुख्यालय माउण्ट आबू, राजस्थान से ”इण्डिया बुक्स ऑफ़ रेकार्ड“ से सम्मानित राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को नैतिक मूल्यों व श्रेष्ठ संस्कारों की ओर पे्ररित करना अत्यन्त आवश्यक है। आध्यात्मिक और नैतिक षिक्षा द्वारा युवाओं को चरित्रवान और सषक्त बनाया जा सकता है। सकारात्मक चिन्तन और श्रेष्ठ वातावरण द्वारा युवाओं के आन्तरिक शक्तियों का विकास किया जा सकता है। बचपन के संस्कार ही सदा के लिए काम आएगा। प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक ने कहा कि आज के युवा अपनी शक्ति और ऊर्जा को सद्कार्यो में लगाएँ।  समाज और देश के विकास में अमूल्य योगदान दें। सुख शांति सर्वत्र व्याप्त हो। इसके लिए सचेष्ट रहें। हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व है।स्थानीय ब्रह्मकुमारी राजयोग सेवा केन्द्र की बी0 के0 जयमाला बहन ने ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विश्वविद्यालय में सिखाया जाने वाला ज्ञान के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में एकाग्रता हेतु राजयोग मेडीटेशन भी सिखाया गया साथ ही ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने छात्र-छात्राओं को बुराईयों को त्यागने की प्रतिज्ञा भी कराई।क्षेत्रीय बालिका शिक्षा संयोजिका कीर्ति रष्मि ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर मांउट आबू से पधारे बी0 के0 संजय भाई, बी0 के0 नम्रता बहन, बी0 के0 पूजा बहन, उपप्रधानाचार्य उज्ज्वल किषोर सिन्हा सहित सभी शिक्षक उपस्थित थे।

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