कानपुर में जमाती के उपद्रव से अस्पताल त्रस्त है। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ाने में तबलीगी जमात के लोगों की बड़ी भूमिका है। आँकड़ों से भी यह जगजाहिर है। बावजूद इसके उनकी करतूतों पर लगाम लगता नहीं दिख रहा। देश के अन्य हिस्सों की तरह उत्तर प्रदेश के कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भी जमाती भर्ती हैं। उनकी हरकतों से पूरा अस्पताल प्रशासन परेशान है।
उनकी मनमानी और उपद्रव को मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. आरती लालचंदानी ने बताय। बीते दिनों जमातियों ने वार्ड बॉय के साथ मारपीट की। खाने की थाली में लात मार दी। वे बिरयानी और नॉनवेज मॉग रहे हैं।
डॉ.आरती लालचंदानी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में 70 लोग भर्ती हैं। इनमें से 60 कोरोना पॉजिटिव हैं। इनमें से अधिकांश जमाती हैं। उनका कहना है कि जब से वार्ड में कुछ नौजवान जमाती भर्ती हुए हैं, तब से ही इन लोगों ने पूरे स्टाफ को परेशान कर रखा है। इन लोगों को समय से खाना मिल रहा। मिनरल वाटर और फल दिया जा रहा। लेकिन, उनकी फरमाइश खत्म नहीं हो रही।
प्रिंसिपल ने बताया कि ये लोग लगातार मेडिकल स्टाफ को तंग कर रहे हैं। उनके साथ बदतमीजी कर रहे हैं। वार्ड में उपद्रव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब सोमवार को खाना देने गए वार्ड बॉय के हाथ में रखी थाली को जमातियों ने लात मार दी और कहा कि हमें खाने में नॉनवेज और बिरयानी चाहिए, जबकि हम पहले ही कह चुके हैं कि ये सब हम उपलब्ध नहीं करा सकते।
इतना ही नहीं जमातियों ने वार्ड बॉय को पकड़कर एक-दो थप्पड़ जड़ दिए। उसे जान बचाकर भागना पड़ा। प्रिंसपिल ने कहा कि मैं बहुत दुखी हूँ। एक तरफ तो हम मौत से जंग लड़ रहे हैं और दूसरी तरफ ये लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
इस अस्पताल में भर्ती जमातियों की करतूत पहले भी सामने आ चुकी है। क्वारंटाइन वार्ड में भर्ती जमातियों ने मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ का सहयोग न करते हुए उनके साथ बदसलूकी की थी। वार्ड में थूक-थूककर गंदगी फैलाई थी और सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ाया था। क्वारंटाइन में रहने के बावजूद भी एक ही बेड पर बैठने और जाँच कराने से इनकार भी कर दिया था।
हालॉंकि बाद में ऐसी खबरें आई थी कि जमातियों के व्यवहार में बदलाव आया है। डॉ. आरती लालचंदानी ने कहा था, “अब अस्पताल में भर्ती संक्रमित जमातियों को अपनी भूल का एहसास हो गया है। इससे पहले वे संक्रमण फैलाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे थे, लेकिन पूरे विश्व में बिगड़ते हालात को देख उनके व्यवहार में बदलाव आया है। अब वे आसानी से दवाइयाँ खा रहे हैं, क्योंकि यह उनके भले के लिए ही है।” लेकिन अब वे एक बार फिर से उपद्रव पर उतर आए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.