जयकिशन जी के  पुण्यतिथि पर विशेष
पटना, 12 सिंतबर। जयकिशन दयामाई पंचाल का जन्म 4 नवंबर 1929 में बंसदा, गुजरात  में हुआ था।  संगीत समूह बाद में जयकिशन मुंबई के पृथ्वी थिएटर में काम करने लगे। जहां उनकी मुलाकात ‘शंकर सिंह रघुवंशी’ से हुई। उसके बाद उनकी जुगलबंदी ने संगीत की दुनिया मे कीर्तिमान स्थापित कर दिया।
शंकर सिंह रघुवंशी और जयकिशन दयामाई पंचाल की जुगलबंदी ने जिस शंकर-जयकिशन युग की शुरूआत की, वो 1949 से 1969 के बीच पूरे बीस सालों तक सुरीले दौर के तौर पर सिने इतिहास में दर्ज हैं।

दोस्ती में अनबन शंकर और जयकिशन ने एक दूसरे से वादा किया था कि वे कभी किसी को नहीं बताएंगे कि धुन किसने बनायी है लेकिन एक बार जयकिशन इस वादे को भूल गए और मशहूर सिने पत्रिका फिल्मफेयर के लेख में बता दिया कि फिल्म संगम के गीत ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज न होना’ की धुन उन्होंने बनाई थी।
इस बात से शंकर काफी नाराज हुए। उनकी नाराजगी पूरी तरह तो नहीं मिटी लेकिन बाद में पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के प्रयासों से शंकर और जयकिशन के बीच हुए मतभेद को कुछ हद तक कम किया जा सका।
जोड़ी को सर्वाधिक नौ बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शंकर और जयकिशन की यह जोड़ी 1971 तक कायम रही। बारह सितंबर 1971 को जयकिशन इस दुनिया को अलविदा कह गए।

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