भारतीय संस्कृति की समृद्धि का सबसे बेहतर प्रमाण है यह है कि जब यूरोपीय सभ्यता अपने शैशव काल में था उस समय भारत से विश्व भर में औषधि, वस्त्र, मसाले और कई प्रकार के तैयार वस्तुओं का व्यापार होता था. इस कारण हमें कभी भी किसी मायने में लज्जित होने की आवश्यकता नहीं है. उक्त बातें पटना संग्रहालय के सभागार में बिहार पूराविद परिषद और फेसेस के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित डॉ प्रकाश चंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान में डॉक्टर बालमुकुंद पांडे ने कहीं. अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के संगठन सचिव डॉ बालमुकुंद पांडे ने भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयाम पर व्याख्यान दिया. वह भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों पर प्रकाश डाल रहे थे. कार्यक्रम के दौरान बालमुकुंद ने कहा कि डॉक्टर प्रकाश चरण प्रसाद पहले भारतीय राष्ट्रवाद इतिहासकार और पुरातत्व विद थे जिन्होंने इस विषय पर पहला शोध कार्य किया.

नव नालंदा महाविहार के कुलपति और बौद्ध अध्ययन के प्रसिद्ध विद्वान डॉ वेद नाथ लाभ कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार पूराविद परिषद के अध्यक्ष चितरंजन प्रसाद सिन्हा ने की.

Leave a Reply

Your email address will not be published.