पटना (विसंके)। सिवान के नागरिक माफियाओं से परेशान हैं। बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन के समय होने वाले खौफ को लोग भूले भी नहीं कि अब कुख्यात खान ब्रदर्स के दहशत में रहने लगे हैं। शहाबुद्दीन के समय विरोध करने की सजा एसिड से नहला देना होता था तो अयूब-रईस-चांद से गद्दारी की सजा बोटी-बोटी काटकर नदी में बहा देना।
पूर्णिया से एसटीएफ ने सिवान के चर्चित अपराधी अयूब खान को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया। मेडिकल और कोविड जांच के बाद पुलिस उसे सिवान के नगर थाना लेकर आयी। पुलिस हिरासत में वह लगातार बेगुनाह होने का ढोंग कर रहा था। स्वयं को मासूम बताते हुए वह किसी प्रकार पुलिस गिरफ्त से बचने की कोशिश कर रहा था। लेकिन, एसटीएट की टीम के सामने उसकी एक नहीं चली। अयूब के अपराध की दुनिया पूर्वोत्तर से पूरे बिहार तक फैला हुआ है। गंगटोक से आते समय पूर्णिया के बौंसी चेक पोस्ट पर एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया। उसका खौफ इतना था कि पुलिस उसे बार-बार ठिकाना बदलते हुए सिवान लायी थी। कई थानों में उसे इधर-उधर रखा गया।
रविवार 2 जनवरी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे सिवान लाया गया। जहां मेडिकल जांच और कोविड जांच कराया गया। 3 जनवरी को उसकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आयी। 4 जनवरी को उसे जेल भेज दिया गया।
अयूब खान और उसके छोटे भाई रईस खान की अपराध की दुनिया लगभग 20 वर्षों की है। शहाबुद्दीन के समय ही ये लोग एक प्रकार से उनके गुर्गे थे। 2005 के दोनों विधान सभा चुनाव में इनके पिताजी कमरूलहक रघुनाथपुर विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। फरवरी और नवंबर में हुए दोनों विधान सभा चुनाव में इन्हें कड़ी शिकस्त मिली थी। यहां से जगमातो देवी निर्वाचित हुई थी। इसी चुनाव में इनके पिताजी की शहाबुद्दीन से झड़प हुई थी। शहाबुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद इनके अपराध की दुनिया बढ़ती चली गयी।
खान ब्रदर्स के नाम से कुख्यात अयूब खान, रईस खान और चांद खान सिवान से अधिक बिहार के अन्य क्षेत्र, उड़ीसा और झारखंड में अपराध करते थे। राऊर केला समेत कई स्थानों पर इन लोगों के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज बताये जाते हैं। ज्ञासपुर दियारा को अपना केन्द्र बनाकर ये लोग कार्य करते रहे। यह इलाका इतना गहन है कि पुलिस भी बगैर हेलीकाॅप्टर के यहां नहीं जा सकती।
इन दिनों इन लोगों ने सिवान में विवादित जमीन का धंधा और रेलवे के ठेकदारी में अपने गुर्गों को उतारा था। पिछले वर्ष 7 नवंबर को तीन युवक क्रमशः विशाल सिंह, अंशु सिंह एवं इनके चालक प्रमेंद्र यादव के अपहरण के प्राथमिकी विशाल सिंह की मां सुनीता सिंह ने दर्ज करायी थी। विशाल के दोस्त संदीप की संलिप्तता पाते हुए पुलिस ने उसे 23 नवंबर को गिरफ्तार किया था। पुलिस के समक्ष संदीप ने स्वीकार किया अयूब खान उर्फ बड़े भाई के इशारे पर वह इन तीनों को बरहरिया लेकर गया था। जहां बड़े भाई ने इन तीनों को ठिकाना लगाने की बात कही थी। पुलिस की पूछताछ में अयूब ने स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों की हत्या कर दी। इन तीनों को उसने चाय में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश कर दिया। फिर इन तीनों की हत्या गला में गमछा कसकर कर दी और शव को टुकड़े-टुकड़े कर सिसवन थाना क्षेत्र के सरयू नदी में फेंक दिया। सरयू नदी के साईंपुर तीनमुहानी घाट पर इसने इनके न सिर्फ शव बल्कि कपड़ा जूता इत्यादि फेंक दिया।
छोटे भाई रईस की इच्छा सिवान के स्थानीय प्राधिकरण से विधान परिषद् में जाने की है। इस बार वह काफी सक्रिय भी है। सिवान जिला परिषद् की उपाध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद चांद तारा खातून ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि उनकी यह विजय रईस खान के आशीर्वाद से हुई है। स्थानीय निकायों में अधिकांश अपने लोगों को जितवाकर रईस ने एक प्रकार से अपनी दावेदारी मजबूत कर रखी है।

– संजीव कुमार, विसंके, संपादक

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