पटना, 21 नवंबर। श्री राम मंदिर के ऐतिहासिक साक्ष्य को नजरअंदाज कर न्यायालय हिंदुओं हित के साथ ढुलमुल रवैया अपनाए हुए हैं। उक्त बाते इतिहास संकलन समिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बालमुकुंद पांडे ने कहा। उन्होंने कहा कि न्यायालय में निर्णय किस बात पर होना था और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसका बंटाधार कर केस की दिशा ही बदल दी। इससे जाहिर होता है कि न्यायालय श्री राम मंदिर पर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर इस विषय का निर्णय बहुत पहले ही हो सकता था परंतु हिन्दू हित की बात को ना सोचते हुए आज सर्वोच्च न्यायालय भी उसी रास्ते पर चल रहा है।
पांडे जी ने कहा कि न्यायालय के टालमटोल रवैए का साक्ष्य वर्तमान में खूब देखने को मिल रहा है। एक ओर सबरीमाला मंदिर एवं जलीकट्टू पर न्यायालय का निर्णय तुरंत आता है वहीं दूसरी ओर तीन तलाक, श्री राम मंदिर और राम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका संदेहास्पद नजर आती है। उन्होंने कहा कि अब हिंदुओं का सब्र जवाब दे रहा है न्यायालय इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई कर निर्णय दे। मौजूद इतिहास साक्ष्यों के आधार पर अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति यह कामना करता है कि अयोध्या में जल्द से जल्द एक भव्य श्री राम मंदिर बने।
प्रेस वार्ता में इतिहास संकलन समिति बिहार के अध्यक्ष राजीव रंजन, संगठन सचिव अरुण कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

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