केरल की माकपानीत वाममोर्चा सरकार ने अब त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) में एक गैर-हिंदू आयुक्त और उपायुक्त नियुक्त करने का फैसला लिया है। एक मलयालम चैनल ने केरल सरकार द्वारा 6 जुलाई, 2018 को जारी अधिसूचना का ब्योरा हासिल किया है, जिसके पृष्ठ क्र. 3 पर श्रेणी 5 में कहा गया है: ‘‘धारा 29 में किया गया संशोधन-मुख्य अधिनियम की धारा 29 के उपखण्ड (2) में लिखा शब्द ‘जो भी बोर्ड द्वारा नियुक्त किया जाएगा, वह एक हिंदू होगा’ हटा दिया जाएगा।’’
दूसरे शब्दों में, साफ है कि यह हिंदुओं और उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कदम है। माकपा हिंदू संस्कृति को नष्ट करने की दिशा में बढ़ रही है। केरल की सड़कों पर इसके विरुद्ध उभर रहा आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हिंदू महिलाओं के अपार समूह सरकार से सबरीमला मंदिर की परंपरा की रक्षा करने की मांग के साथ आंदोलनरत हैं। गत 5 अक्तूबर को टीडीबी सचिव और कई अन्य अधिकारियों को मलयालम भाषा में संबोधित एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि मंदिर में विशेष अवसरों पर विशेष कार्यों के लिए महिला कर्मियों को तैनात किया जाए। यह सरकार के एक और आक्रामक और अहंकारी कदम का प्रतीक है। यह उन हिंदू महिलाओं के लिए एक चुनौती है जो सबरीमला मंदिर में युवा महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ पहले से ही आंदोलनरत हैं। माकपा अब पार्टी के महिला प्रकोष्ठ जनाधिपत्य महिला संघ को तैनात करके न्याय मांगने के लिए खड़ी श्रद्धालु महिलाओं के आंदोलन को कमजोर करने की भरपूर कोशिश कर रही है। पहला कदम पतनमथिट्टा में कम्युनिस्ट महिलाओं की रैली आयोजित करना है। उसके बाद सभी जिलों में ऐसी ही रैलियां आयोजित करने की योजना है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और कुटुम्बश्री परियोजनाओं से जुड़े माकपा कार्यकर्ताओं को रैलियों का आयोजन करने का जिम्मा दिया गया है। माना जा रहा है, इसके पीछे कारण है हिंदू महिलाओं की रैलियों में जबरदस्त भागीदारी। माकपा शासित पंचायतों ने कुटुम्बश्री और रोजगार गारंटी योजना के अंदर सूचीबद्ध कर्मचारियों को धमकी दी है कि यदि वे माकपा द्वारा प्रायोजित रैलियों में भाग नहीं लेते तो उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी। यह कदम दर्शाता है कि मकापा अपने हिंदू विरोधी कदम के खिलाफ उमड़े आक्रोश का शंखनाद करती विशाल रैलियों को लेकर चिंतित है।
श्रोत- पाञ्चजन्य

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