बेगूसराय के हर-हर महादेव थाना चौक निवासी भाग्यमणि देवी की मौत पिछले दिनों हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार होना था। इस बीच भाग्यमणि देवी के अंतिम संस्कर को लेकर ईसाई धर्म अपनाएं उनका बेटा मनोज पासवान और परिवार के लोगों के बीच विवाद हो गया। मनोज पासवान अपनी मां को दफनाने पर अड़ गया और परिवार के लाख विरोध के बाद भी अपनी मां को बखरी स्थित ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने ले जा रहा था। 02
इस घटना की सुचना जब विश्व हिन्दू परिषद् व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मिली तो उन्होंने मनोज पासवान को समझा-बुझाकर दफनाने से रोका और दाह संस्कार के लिए राजी किया।
परिवार के लोगों ने कहा कि मनोज पासवान के ईसाई धर्म कबूल करने के बाद भी उनकी मां हिंदू रीति-रिवाज और पूजा पद्धति को मानती थी। भाग्यमणि देवी कभी भी हिन्दू धर्म से अलग नहीं हुई थी। मनोज पासवान जबरन उन्हें ईसाई कब्रिस्तान में दफना ना चाहते थे।
इस दौरान स्थानीय नेताओं ने कहा कि हिंदू धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। आज गरीब और दलित हिंदुओं को लोभ-लालच देकर के साथ-साथ जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और उन्हें अपनी संस्कृति से अलग किया जा रहा है। उन्होंने देश में धर्मांतरण के विरुद्ध सख्त कानून बनाने की मांग की ताकि कोई भी लोग लोभ-लालच देकर या जबरन धर्म परिवर्तन ना करवा सके। वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि मनोज पासवान को लोभ-लालच दे कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है।

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