पटना, 23 अगस्त। बिहार में कानून व्यवस्था को दर किनार कर लगातार गौकशी और अवैध गौ व्यापार बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशासन और पशु माफिया की गिरोहबंदी का खुला सबूत उस वक्त सामने आया जब ‘गऊ ज्ञान संस्था’ के कार्यकर्ताओं और उनकी गौशाला पर हमला कर दिया गया।
संस्था के कार्यकर्ताओं को जानवरों के पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान लगातार धमकियां मिल रही थीं, लेकिन शिकायत के बाबजूद प्रशासन चुप बैठा रहा। कुछ माह पहले करीब 150 जानवरों को पशु माफियाओं द्वार चुरा लिया गया था तब पुलिस अधिकारी ( एसएचओ रामराज सिंह) ने शिकायत लेने तक से इनकार कर दिया और किसी तरह की कोई सुरक्षा भी मुहैया नहीं कराई। किशनगंज का रहने वाला अनवर इस सारे खेल का मुख्या किरदार है और बिहार में पशु माफियाओं में से एक है। उक्त बाते गौ ज्ञान संस्था के कार्यकर्ताओं ने कही।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि 15 अगस्त को बारा में सुनियोजित हमला करके 5 गायों को मार दिया गया, 230 मवेशी लापता कर दिए गए और एक ट्रॅक्टर, बाइक, सूखे चारे को आग के हवाले कर दिया गया। गौ माफिया को बचाने के लिए एसएचओ ढीबरा, मनोज कुमार और सीआरपीएफ ने इस हमले को नक्सली अटैक का रंग देने की कोशिश भी की गई। इस काम में सीमापार के बांग्लादेशी पशु माफिया का भी हाथ है और मोटी रकम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
वही 17 अगस्त को जब बबहांडी गौशाला में गऊ ज्ञान संस्था की एक बुजुर्ग महिला सेवा के लिए पहुंची तो पशु माफिया द्वारा उकसाई गई और भीड़ ने उनपर हमला कर दिया। उन्होने चीखकर धमकी दी कि अगर वो वहां से नहीं गईँ तो गौशाला को तहस नहस कर दिया जाएगा। जब बुजुर्ग महिला सीआरपीएफ थाने के एसएचओ रामराज सिंह के पास गईं तो उन्होने शिकायत दर्ज करने दर्ज से साफ इनकार कर दिया। 18 अगस्त 2018, बारा में हो रहे विरोध और पुलिस के असहयोग से तंग आकर गऊ ज्ञान संस्था के तीन कार्यकर्ता गायों को बारा से देव पैदल ले जाकर शिफ्ट करना चाह रहे थे तब तीन गौ माफियाओं ने 140 गायें लापता कर दिया। बिहार में गौ माफियाओं द्वारा लगातार गऊ ज्ञान संस्था के कार्यकर्ताओं को धमकिया दी रही है उक्त बाते प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कार्यकर्ताओं ने कही।

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