बिहार देश का ऐसा प्रांत है जो जाड़ा, गर्मी और बरसात; तीनों से प्रभावित होता है। यहां जाड़े में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री तक चला जाता है, तो गर्मी में पारा 48 डिग्री तक पहुंच जाता है। बरसात में भी सूबा बाढ़ का दंश झेलता है। ऐसे में प्रकृति से साम्य स्थापित कर रहने के लिए कई विकल्प ढूंढ़े जा रहे हैं। गर्मी की भीषणता बढ़ने की कई वजह है। इसमंे एक कारण प्रदूषण का भी है। गर्मी के कारण घर के अंदर रह पाना बेहद मुश्किल होता है। एसी और कूलर कृत्रिम ठंडक तो देते हैं लेकिन उनका दूरगामी परिणाम शरीर के लिए अच्छा नहीं होता। ऐसे में अगर घरों या कार्यालयों में एलोवेरा, गार्डेन मम सरीखे पौधे लगाये जायें तो न सिर्फ गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि प्रदूषण पर भी रोक लगेगी।

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नासा की एक रिपोर्ट में नौ ऐसे पौधों की जानकारी दी गई है, जिन्हें घर के अंदर रखने से तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट आती है। इन पौधों में ड्रेकेना, गोल्डन पोथोस, पीस लीली, एलोवेरा, बैंबू पाम, स्नेक प्लांट, बोस्टोन फर्ब, बेबी रबर प्लांट और स्पाइडर प्लांट शामिल हैं। ये पौधे घर के अंदर हवा साफ करते ही हैं साथ ही तापमान कम करने में भी मददगार होते हैं। इनसे काफी मात्रा में आॅक्सीजन भी प्राप्त होती है।
गर्मी से राहत देने के लिए भभुआ के हरियाली मिशन ने एक विशेष पहल शुरू की है। भभुआ जिले में 9 अगस्त को वन महोत्सव के अवसर पर वृहत पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाई जायेगी। इस दौरान 20 लाख से अधिक पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें ऐसे पौधों को ज्यादा शामिल किया जायेगा।

– संजीव कुमार

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