गणित अभ्यास का विषय है। बिना अभ्यास का गणित अंधों के समान है। छात्र गणित में अध्याय से संबंधित तथ्यों को सावधानीपूर्वक पढ़ें और उसकी समझ पैदा करें। अपनी कठिनाईयों का समाधान शिक्षकों के माध्यम से करें। अभ्यास के प्रश्नो का समाधान खुद से करें। गणित में ज्यामिति मस्तिष्क के तार्किक क्षमता का विकास करता है, बीजगणित एकाग्रता को बढ़ाता है, क्षेत्रमिति अधिक समय तक बिना उबे बैठकर कार्य करने की क्षमता विकसित करता है, तथा अंकगणित अंकों के विशिष्ठ गुणों के साथ कार्य करने की दक्षता का निर्माण करता है। उक्त बातें सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर के प्रशाल में आयोजित महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के 125 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित गणित प्रदर्शनी में प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आचार्य गोपाल कृष्ण ने कही।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सहमंत्री डा0 कमल किशोर सिन्हा ने कहा कि महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को बचपन से हीं गणित के प्रति अपार रूचि थी। वो अंको के जादूगर थे। उन्होनें कम समय और कम उम्र में हीं गणित के बहुत सारे तथ्यों एवं सूत्रों को विश्व के सामने प्रस्तुत किये।
उपप्रधानाचार्य उज्ज्वल किशोर सिन्हा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीनिवास रामानुजन के पास बचपन से हीं संसाधनों का अभाव रहा, बावजूद इसके उन्होनें अपनी सफलता में इन अभावों की चिंता किए बिना अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहे और कम हीं समय में विश्व को गणित के क्षेत्र में एक नई दिशा देने में सफल साबित हुए।

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इस गणित प्रदर्शनी में कक्षा सप्तम की त्रिशा कुमारी, अष्टम की सौम्या शिल्पी, ऐश्वर्या कुमारी, सप्तम के छात्र सिद्धान्त कुमार, दशम के श्लोक कुमार का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। वहीं कक्षा सप्तम के समीर पटेल का गणितीय जादू एवं नेहा कुमारी, श्रेया साक्षी, वेणु कौशिक, अम्बर कुमार, श्रेयश लाल, अनन्त राज, प्रांजल प्रिय एवं हर्ष आनंद का गणितीय प्रदर्श छात्रों के बीच सराहनीय रहा।
इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें श्रीनिवास रामानुजन के जीवन एवं उनके योगदान विषय पर विद्यालय के कई छात्र-छात्राओं ने विस्तृत जानकरी दी जिनमें हर्षिता कंगन, आर्यन सिंह एवं आदित्य का भाषण उत्कृष्ट रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उपप्रधानाचार्य उज्ज्वल किशोर सिन्हा, आचार्य नवनीत चन्द्र मोहन, गोपाल कृष्ण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य नवनीत चन्द्र मोहन के द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य उपस्थित थे।

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