मिस्र की राजधानी काहिरा के दक्षिण में स्थित रेगिस्तान अबू गोराब में ४५०० वर्ष पुराना सूर्य मंदिर मिला है। इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में इसे अभूतपूर्व एवं असाधारण खोज कहा जा रहा है।
पुरातत्वविदों ने १८९८ में न्यूसेरा के द्वारा बनवाये गए सूर्य मंदिर की खोज की थी । न्यूसेरा मिस्र के पांचवें राजवंश के छठा सम्राट थे और उन्होंने २४०० से २३७० ईसा पूर्व तक शासन किया था।
नई खोज से पता चलता है कि उसे अन्य सूर्य मंदिर के खंडहर के ऊपर बनवाया गया है। गहन अध्ययन करने पर अनुमान हुआ कि वहाँ खुदाई में और भी सूर्य मंदिर मिल सकते हैं। उसके बाद खुदाई के कामों में, तेजी लायी गई और इस नये सूर्य मंदिर का पता चला।
पुरातत्वविदों ने १८९८ में न्यूसेरा के सूर्य मंदिर की खोज की थी । न्यूसेरा मिस्र के पाचवें राजवंश का छठा सम्राट था । जिसने २४०० से २३७० ईसा पूर्व तक शासन किया था । नयी खोज से पता चलता है कि उसे एक अन्य सूर्य मंदिर के खंडहरों के उपर बनाया गया था।

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बारीकी से अध्ययन करने पर पुरातत्वविदों को ज्ञात हुआ कि मिस्र में और ज्यादा सूर्य मंदिर हैं। फिर तो पूरे देश में इन सूर्य मंदिरों की तलाश के लिए खुदाई का काम शुरू हो गया। एक सूर्य मंदिर जमीन से उभरकर सामने आया।
पुरातत्वविदों का कहना है कि यह सूर्य मंदिर पांचवें साम्राज्य के फैरोह राजा के काल में बनवाया गया था। उस वक्त के राजा की इच्छा थी कि आम लोग उनको भगवान की तरह देखें। उन राजाओं ने साथ ही अनेक विशाल पिरामिड भी बनवाए थे। ये वे इमारतें हैं, जिनमें फैरोह राजा की मृत्यु के बाद, उनके शव को दफनाया गया था। उनकी यहां कब्रगाह हैं। वे राजा इस दुनिया से जाने के बाद भगवान का दर्जा हासिल करना चाहते थे। इसीलिए उनके शवों को लेप से संरक्षित करके विभिन्न आवश्यक सामग्रियों के साथ दफनाया जाता था, जिससे कि वे ‘मृत्योपरांत जीवन’, जिसे पुरातत्वविद ‘आफ्टरलाइफ’ कहते हैं, में वे प्राचीन देवताओं के साथ एकाकार होकर फिर से पूरे शानोशौकत से उस दुनिया में राज करें।
माना जाता है कि प्राचीन मिस्र में वहां के पिरामिड काल के राजाओं ने सूर्य की उपासना को प्रचलित करने के उद्देश्य से अनेक सूर्य मंदिर बनवाए थे। पुरातत्वविदों ने ऐसे करीब 6 सूर्य मंदिरों की खोज की है, लेकिन फिलहाल मय सबूत, एक मंदिर के अवशेष खुदाई से प्राप्त हुए हैं। लेकिन इससे यह तो तय है कि प्राचीन काल में मिस्र के लोग सूर्य की उपासना करते थे।

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