लेखक- राकेश सिन्हा, सांसद

महिलाओं को सार्वजनिक भूमिका के प्रशंसक थे। तभी तो संघ की शाखाओं एवं शिविरों में महिला नेताओं को व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाता था। अखिल भारतीय महिला परिषद ने संघ के सामाजिक सुधार के दृष्टिकोण का समर्थन किया था। इसकी अध्यक्षा राजकुमारी अमृत कुंवर एवं अन्य सदस्य, जिनमें राज्य विधानसभा की उपसभापति अनसूया बाई काले भी थीं, नागपुर के संघ शिविर में 28 दिसंबर 1937 को आए थे।

 

यह कोई पहली घटना नहीं थी। इसके पहले भी सार्वजनिक जीवन में कार्यरत महिला नेताओं एवं समाजसेवियों को आमंत्रित किया गया था। कांग्रेस की नेता कमलाबाई ने 21 नवंबर 1938 को कोंकण में संघ की शाखा में अपना भाषण दिया था।

इसी प्रकार पार्वतीबाई चिटणवीस 9 दिसंबर 1934 को संघ की नागपुर शाखा के वार्षिक उत्सव में मुख्य अतिथि थीं। मध्यप्रांत विधानसभा की मनोनीत सदस्या रमाबाई तांबे संघ के प्रशंसकों में थीं।

डा. हेडगेवार महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक भूमिका के प्रति कितने जागरूक थे, इसका पता इस बात से चलता है कि देश के सर्वाधिक पुराने महिला संगठनों में से एक-राष्ट्र सेविका समिति के वह प्रेरणा स्रोत थे। संघ से प्रभावित महिला कार्यकर्ताओं में उन्होंने आत्मविश्वास एवं हिम्मत पैदा करके उन्हें स्वतंत्र संगठन की नींव रखने के लिए प्रेरित किया था। मध्यप्रांत में दो महिला संगठनों-राष्ट्र सेविका समिति (वर्धा) और राष्ट्रीय स्वयंसेविका संघ (भंडारा) की स्थापना 1935-36 में हुई थी। डा. हेडगेवार 1 से अक्टूबर 1936 में दोनों संगठनों का विलय हो गया। समिति द्वारा क प्रयास महिलाओं को सैद्धांतिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

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