कटिहारए 21 जुलाई। प्रतेक दिन सीमांचल की तस्वीर बदलती जा रही है. इस बार एक और महादलित दीपनारायण सहनी जमीन-जिहाद का शिकार हो गए. कटिहार से लगभाग 15 किलोमीटर दूर सुखासन के रहने वाले दीपनारायण साहनी, पिता स्व. विरो साहनी जो कि महादलित समुदाय से थे उनको शांतिप्रिय समुदाय के लोगों ने एसिड से जला कर मार दिया.

दीपनारायण सहनी का 2 एकड़ 12 डिसमिल जमीन पर लियाकत अली के द्वारा कब्जा कर लिया गया। इस संदर्भ में उन्होंने प्रशासन से इसकी शिकायत और न्याय के लिए गुहार भी लाया. क्योंकि उन्हें जान से भी मारने की धमकी मिली थी लेकिन प्रशासन ने कोई सहायता नहीं किया, कल रात उनको एसिड से जला कर मौत के घाट उतार दिया गया.

दीपनारायण सहनी के पुत्र मिथलेश का कहना है कि सन् 1980-81 से लेकर 2010-11 तक जमीन का रशीद काटा गया था, उसके बाद जब वे रशीद कटाने के लिए पहुंचे तो कर्मचारी प्रदीप लाल ने जमाबंदी फटा होने का कारण बता कर उन्हें अंचल पदादिकारी के पास सुधर के लिए भेज दिया. तब तक दूसरा पक्ष उस जमीन पर अपना दावा रखने लगा. इस बीच सेमापुर ओपी थाना प्रभारी को एप्लीकेशन भी दिया लेकिन रिसीविंग के नाम पर शिर्फ़ आश्वासन ही मिला फिर वे अंचल पदाधिकारी के पास गए वहां भी उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया गया. प्रशासन और अंचल पदादिकारी से न्याय नहीं मिलने पर वे हतास हो गए. फिर भी उमीद लिए जनता दरबार में गये. जनता दरबार में अपनी पीड़ा को उन्होंने व्यक्त किया और न्याय की गुहार लगाई. वहां भी न्याय के नाम पर शिर्फ़ फोन आया लेकिन न्याय नहीं मिला.

मिथलेश का कहना है कि लियाकत अली, हजरत अली, मो. वारिक सहित अठारह लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है.

बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा प्रतेक दिन स्थानीय लोगों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. साथ ही वे अपना आसियाना बनाकर बर्चस्व स्थापित कर रहे है. जिसका साथ वहां के शांतिप्रिय समुदाय और वहां के प्रशासन दे रहे है. इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिला. यह कटिहार की कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी कटिहार के आजमनगर में महादलित पज्जन दास के पुरे परिवार को जिन्दा जलाकर मार दिया गया था जिसमे पज्जन दास, उनकी गर्भवती पत्नी मंजुला देवी और दो मासूम बेटियां सामिल थी और न जाने कितनी जाने गई है.

ऐसा लग रहा है दलितों और महादलितों पर लगातार हो रहे ऐसी घटना को रोकने में कटिहार प्रशासन नाकाम हो रही है.

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