बिहार की राजधानी पटना से महज 22 किलोमीटर दूर हाजीपुर के कुशवाहा कॉलोनी में धर्मांतरण का कार्य ईसाइ समुदाय द्वारा भेजे गए लोगों द्वारा चलाया जा रहा था. स्थानीय लोगों के अनुसार जिले में धर्मांतरण का कार्य पिछले चार-पांच वर्षों से चल रहा है. वृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों ने एक महिला और दो पुरुषों को धर्मांतरण कराते रंगे हांथों धर दबोचा. इन तीनों के पास से धर्मांतरण संबंधित स्टांप पेपर, पूजा-पाठ के सामान, प्रार्थना पत्र की कॉपियां, चर्च का झंडा, एक दर्जन से अधिक लोगों के नाम व हस्ताक्षर के स्टाम्प पेपर के साथ-साथ 50 रुपये का ब्लैंक स्टाम्प पेपर भी पाया गया। इन तीनों के पास से भारत में बने फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किया गया है जिसमें एक का नाम कमला बताया गया.
सबसे बड़ी बात यह है कि तीनों के पास से विदेशी पहचान पत्र भी मिले है.
स्थानीय महिला ने बताया कि ये लोग हमारे घर पर आए और दरवाजे पर जबरदस्ती बैठ गए. धर्मांतरण करवाने आये लोगों ने मुझसे कहा कि आप प्रार्थना करें आप की जितनी भी दुख-दर्द हैं वह नष्ट हो जाएंगे. महिला ने मना किया लेकिन इन लोगों ने जबरदस्ती उनसे प्रार्थना शुरू करवाया. कुछ समय बाद जीसस क्राइस्ट चर्च के झंडे पर हाथ रखवा प्रार्थना करवाने लगे, तभी स्थानीय लोग वहां आ गए और इन तीनों को पकड़ लिया.
स्थानीय लोगों ने कहा कि वैशाली में दो दर्जन से अधिक चर्च है जहाँ धर्मांतरण का कार्य चलता रहता है. धर्मांतरण करवाने वाले लोग दलित हिन्दुओं, अनपढ़, गरीब लोगों को लोभ-लालच दे कर धर्मांतरण के जाल में फंसाते है और उन्हें हिन्दू धर्म से ईसाइ धर्म में धर्मान्तरित करवा दिया जाता है.
धर्मांतरण कराने आए पकड़े गए लोगों ने कबूल किया कि वे आरा से सुबह 6:00 बजे हाजीपुर के लिए रवाना हुए और यहां आए एक ने कबूल किया कि एक व्यक्ति को ₹400 दिए जाते हैं.

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