कटिहार, 14 जून। बिहार के कटिहार जिले के आजमनगर घोरदाह गाँव में शांतिप्रिय समुदाय ने एक दलित परिवार के चार लोगों को जिन्दा जला दिया। इस क्रूर घटना का बहाना जमीन का छोटा सा हिस्सा बना।

घोरदोह गाँव में 35 वर्षीय पंचम दास अपनी 32 वर्षीय दिव्यांग पत्नी मंजुला देवी और दो बेटी प्रीति और किरण के साथ रहते थे। दोनों बेटियों की उम्र मात्र चार वर्ष और दो वर्ष थी। पंचम दास चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करता था। कौन जनता था कि रात उनके ही पुरे परिवार को जला कर अँधेरा दूर किया जायेगा और इसकी कीमत मौत होगी।

बात, रात 11 जून, 2018 की है पंचम दास अपनी चाय की दुकान बंद कर खाना खाकर अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ थे। दो वक्त के रोटी की जुगाड़ में काम करते-करते पंचम दास थक चूके थे। इस कारण वह सोने की तैयारी कर रहे थे। उनकी पत्नी अपनी दोनों बेटियों को सुलाने का प्रयास कर रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले अब्दुल रहमान अपने सालों के साथ पेट्रोल और माचिस लेकर आता है और सभी को घर में रखे चौकी में बांध कर जिन्दा जला देता है।

 

स्थानीय लोगो का कहना है की शाम में अब्दुल रहमान और उसका साला पंचम दास को धमकी देकर कहा था कि अगर जगह को खाली नहीं किया तो जिन्दा जला दिये जाओगे। ठीक उसी रात अब्दुल रहमान अपने सालों के साथ पंचम के घर आया और पंचम सहित पत्नी और दोनों मासुम बच्चियों को चौकी में बांध कर पेट्रोल डाल कर जला दिया। दोनों बच्ची प्रीति और किरण की मौत घटना स्थल पर ही हो गई। पंचम की पत्नी मंजुला लगभग 70% जल चूकी थी और पंचम दास का शरीर 90% तक जल चूका है। जब दोनों दंपति को उचित ईलाज के लिए कटिहार से भागलपुर स्थित अस्पताल रेफर किया गया तो मंजुला ने रास्ते में ही पंचन दास का साथ छोड़ कर इस क्रूर और मानवता विहीन दुनिया को छोड़ दी। आज पंचम दास का जिंदगी और मौत के बीच, मौत की राह देख रहा हैं।

घटना की सुचना मिलने पर कटिहार के आरक्षी अधीक्षक घटना स्थल पर पहुँचकर  मामले की जाँच में जुट चुकी थी फिर भी अबदुल रहमान और मोकिम अखतरी को ही गिरफ्तार कर पाई है लेकिन सातों आरोपी अभी तक फरार है। दलित परिवार को जिन्दा जला देना और आदिवासीयों को प्रताड़ित करना शांतिप्रिय समुदाय की एक आदत बन चुकी है। कटिहार इस मामले में अव्वल है. बारसोई, आज़मनगर सरीखे इलाके में अघोषित ज़जिया क्र तक ड३णा पड़ता है।

इस बार तो हद हो गई, शांतिप्रिय समुदाय ने पंचम दास के पुरे परिवार को जिन्दा जला कर पंचम के जीवन को अंधकारमय कर दिया।

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