पटना, 19 जून. बाबा योगेंद्र दधीचि स्वरूप थे. कला साधकों के मन में राष्ट्रीय गौरव बोध जागृत करने के लिए  उन्होनें स्वयं को होम कर दिया. 1981 में इस उद्देश्य के लिए उन्होनें 57 वर्ष की आयु में  संस्कार भारती का गठन किया. उनके अथक प्रयास से कुछ ही वर्षों में संस्कार भारती कला क्षेत्र की शीर्ष संस्था बन गई. उक्त विचार पटना के विजय निकेतन में संस्कार भारती की पटना इकाई द्वारा आयोजित पद्मश्री बाबा योगेंद्र की स्मृति सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने व्यक्त किये.

संस्कार भारती के दक्षिण बिहार के प्रान्त अध्यक्ष पद्मश्री श्याम शर्मा ने बाबा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा संघ के प्रचारक थे लेकिन उनके मन में एक सुप्त कलाकार सदा मचलता रहा। देश-विभाजन को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था। संघ शिक्षा वर्ग में उन्होंने इस पर एक प्रदर्शनी बनाई। जिसने भी यह प्रदर्शनी देखी, वह अपनी आँखें पोछने को मजबूर हो गया। फिर तो ऐसी प्रदर्शनियों का सिलसिला चल पड़ा। शिवाजी, धर्म गंगा, जनता की पुकार, जलता कश्मीर, संकट में गोमाता, 1857 के स्वाधीनता संग्राम की अमर गाथा, विदेशी षड्यन्त्र, माँ की पुकार…आदि ने संवेदनशील मनों को झकझोर दिया. ‘भारत की विश्व को देन’ नामक प्रदर्शिनी को विदेशों में भी प्रशंसा मिली.

शीर्ष नेतृत्व ने उनकी इस प्रतिभा को देखकर 57 वर्ष की आयु में 1981 ई0 में ‘संस्कार भारती’ नामक संगठन का निर्माण कर उसका कार्यभार उन्हें सौंपा गया. स्वयं केंद्रित , प्रसिद्धि उन्मुख  कला साधकों के मन में उन्होंने राष्ट्रीय गौरव बोध एवं मातृभूमि के प्रति निष्ठा जगाने में अहम भूमिका निभाई।

घनघोर परिश्रम की वजह से आज पूर्वोत्तर भारत की लगभग 80 से ज्यादा जनजातियों में “अपनी संस्कृति -अपनी पहचान” को स्थापित कर उन्होंने एक लंबी लकीर खींची है। परिणाम पिछले वर्ष प्रयाग कुम्भ में 6 हजार से ज्यादा पूर्वोत्तर के कला साधकों ने अपनी सहभागिता की.

अपने स्नेही स्वभाव से सुश्री लता मंगेशकर, पं.जसराज, नाना पाटेकर, भीमसेन जोशी, अशोक कुमार, रामानंद सागर, मजहरुल सुल्तान पुरी, मुकेश खन्ना, अमोल पालेकर, अनुराधा पौडवाल, सुधीर फड़के, मधुर भंडारकर, सुभाष घई व अनूप जलोटा जैसे प्रख्यात कलासाधकों को वे संस्कार भारती के ध्येय से जोड़ने में सफलता प्राप्त की.

मोतियों जैसे उनके हस्तलिखित पत्रों को लोग श्रद्धा से संभालकर रखते हैं। कला जगत में विद्यमान प्रसिद्धि उन्मुख लालसा के बीच उनकी आत्मीयता,निश्छल व्यवहार, विशुद्ध प्रेम और प्रसिद्धि परांगमुख जीवन उनके दधीचि तुल्य जीवन को ही प्रतिबिंबित करता है.

कार्यक्रम में कला साधकों ने अपने कला के माध्यम से बाबा को श्रधांजलि अर्पित की. प्रसिद्ध नृत्यांगना सुदीपा घोष ने नृत्य से, उत्तर बिहार संस्कार भारती की अध्यक्ष व सुप्रसिद्ध गायिका रंजना झा  और पं. जगत नारायण पाठक ने भजन से बाबा को अपनी श्रद्धांजलि निवेदित की.

आज के स्मृति सभा में बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद व रेणु देवी, समाज सेवी पद्मश्री विमल जैन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह व क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेश कु पांडेय, विद्या भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री ख्याली राम, भाजपा के क्षेत्र संगठन मंत्री नागेंद्र जी, प्रान्त संगठन मंत्री भीखू भाई, स्थानीय विधायक अरुण सिन्हा व संजीव चौरसिया समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे. कार्यक्रम के संयोजक परिजात सौरभ और जितेंद्र कु. चौरसिया थे.

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