पटना, 04 सितम्बर। भारत की आशा के नाम से मशहूर दादाभाई नौरोजी का जन्म 4 सितम्बर 1825 को मुंबई में हुआ था। ये पारसी धर्म से संबंधित थे। 11 वर्षकी उम्र मे गुलबाई के साथ इनकी शादी हुई थी। मशहूर दादाभाई नौरोजी ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ़ इंडिया या वयोवृद्ध महापुरूष भी कहा जाता है।

इनकी शिक्षा बंबई विश्वविद्यालय से हुई। 1852 में स्थापित पहली राजनीतिक संस्था बंबई एसोसिएशन का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। 1855 में एलफिस्टन कॉलेज में गणित के प्रोफेसर नियुक्त किए गए। ये उदारवादी दल से संबंधित थे। कांग्रेस के मंच से 1906 में पहली बार इन्होने ही स्वराज्य की मांग की। 1873  में ये बडौदा रियासत के दिवान बने। 1892 में वे पहले भारतीय थे; जो उदारवादी दल की ओर से फिंसबरी से ब्रिटिश संसद के सदस्य चुने गए। वे 1886-1893 और 1906 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। दादा भाई नौरोजी ने  इंडियन पाॅवर्टी एंड दी ब्रिटिश रूल इन इंडिया में भारत से धन के निकास के सिद्धांत का उल्लेख किया। भारत और ब्रिटेन के रिस्तो की मजबूती के लिए 2014 मे ब्रिटेन  में दादा भाई नौरोजी पुरस्कार की शुरूआत की गई है। फ्लोरा फाउंटेन मुंबई के निकट भारत की आशा की मूर्ति लगाई गई है।  2017 में उनकी 100वीं पुण्यतिथि मनाई गई। 30 जून 1917 में बंबई में इनकी मृत्यु हो गई।

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