पटना विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने CAA के समर्थन में मार्च निकालकर भारत सरकार का समर्थन किया. मार्च में के दौरान घुसपैठिए तेरी खैर नहीं, भारत छोड़ो भारत छोड़ो के नारे भी लग रहे थे.
तुष्टिकरण की राजनीति पुन: बेनकाब
छात्रों को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून 2019 ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने वाला है तथा पाकिस्तान बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान के पीड़ित अल्पसंख्यकों को राहत देने वाला बिल है. कांग्रेसी एवं इसके सहयोगी दलों ने जिस प्रकार से इस विधेयक का विरोध करने का प्रयास किया है उससे इन दलों का वोट बैंक एवं तुष्टिकरण की राजनीति पुन: बेनकाब हुआ है. कांग्रेश भारत विभाजन की अपनी ऐतिहासिक गलतियों के लिए प्रायश्चित करने में एक बार पुन: चुक गई है. बिल का विरोध करने वालों का देश भर में चेहरा बेनकाब हुआ है. इस विरोध के पीछे अर्बन नक्सलियों के षड्यंत्रकारी शक्तियों का हाथ है.
वही सभा को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के पूर्व महासचिव व छात्र नेता मणिकांत मणि ने कहा कि यां कानून धर्म के शिकार आसंख्यक शरणार्थियों के जीवन में आशा की एक नई किरण लेकर आया है. धर्म के आधार पर भारत विभाजन का दंश झेल रहे अनगिनत परिवारों को इससे नया जीवन मिलेगा.

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वही सभा को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के निर्वाचित महासचिव प्रियंका श्रीवास्तव ने कहा कि आज पटना विश्वविद्यालय के तमाम छात्र समुदाय इस बिल के समर्थन में अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और अलगाववादी तत्वों को करारा जवाब दे रहे हैं. विरोध मार्च में पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कोषाध्यक्ष नीतीश पटेल, राजा रवि, गोल्डन शाह अभिषेक सिंह, दीपक कुमार, रवीश, रॉक, रोहित, राज, सोनू कुमार, शशि कुमार, अमरेश कुमार, अमन कुमार, हिमांशु कुमार सहित सैकड़ों अभाविप के छात्र उपस्थित रहे.

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