शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का नाम राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने वाले दो शिक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति इस वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित करेंगे। संत कुमार साहनी बेगूसराय के नक्सल प्रभावित इलाके वीरपुर के सुदूर गांव खरमौली के प्रधान शिक्षक हैं। वहीं अखिलेश्वर पाठक सारण के गरखा प्रखंड अन्तर्गत चैनपुर भैंसमारा के प्रधान सचिव हैं। इन दोनों शिक्षकों ने अपने समर्पण एवं समाज के सहयोग से दयनीय सरकारी विद्यालय को दर्शनीय बनाया।
संत कुमार सहनी वर्ष 2004 में बेगूसराय के खरमौली गांव के मिडिल स्कूल के प्रधान शिक्षक के रूप में आये थे। उस समय सिर्फ 123 बच्चे नामांकित थे। सरकार की विभिन्न योजनाओं का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन किया। शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया। नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीणों को जमीन दान करने के लिए प्रोत्साहित किया और नियमित प्रयास से इस मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उत्क्रमित कराया। अब यहां 1326 बच्चे पढ़ते हैं। इस बार मैट्रिक के रिजल्ट में यहां के बच्चों ने 92 प्रतिशत अंक तक प्राप्त किया है। यहां के बच्चे अब राष्ट्रीय स्तर तक के अधिसंख्य प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।
अखिलेश्वर पाठक ने भी शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया। अखिलेश्वर पाठक 17 साल पूर्व 2003 में शिक्षक बने थे। इनकी पहली पदस्थापना सोनपुर के मध्य विद्यालय, गंगाजल में हुई थी। वहां के तत्कालीन प्रधान शिक्षक के मृत्युपरांत विद्यालय के संचालन की जिम्मेवारी मिली। विद्यालय के दयनीय स्थिति देखकर उनमें कुछ करने की ललक पैदा हुई। विद्यालय की तस्वीर बदलने के लिए इन्होंने अथक प्रयास किया। स्थानीय ग्रामीणों से विद्यालय की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए बातचीत की। ग्रामीणों ने भी सकारात्मक पहल की। धीरे-धीरे विद्यालय की तस्वीर बदलने लगी। इसी दौरान 2005 में ‘हाउ टू टीच’ प्रोग्राम के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में उनका चयन हुआ। 2007 में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लिए जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर बनाये गये। बालिका शिक्षा के लिए जेंडर कोर्डिनेटर भी बने। विद्यालय के प्रधान शिक्षक के साथ सभी दायित्वों का निर्वहन ससमय एवं कर्त्तव्य निष्ठा के साथ किया।
अखिलेश्वर पाठक बच्चों की पढ़ाई में आने वाली सभी समस्याओं के प्रति सजग रहे। बालिका शिक्षा के प्रति जागरूक पाठक को ध्यान आया कि लड़कियों को शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण विद्यालय आने में दिक्कत होती है। उन्होंने जन सहयोग से विद्यालय में शौचालय बनवाया। निजी विद्यालयों में बच्चे प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ते हैं जिससे उनकी गुणवत्ता में फर्क पड़ता है। लिहाजा उन्होंने भी विद्यालयों में प्रोजेक्टर की व्यवस्था कराई थी। स्वच्छ जल की सुविधा उपलब्ध करवाई। लॉकडाउन के समय उन्होंने क्वारंटाइन सेंटर का भी संचालन किया। जहां वे श्रमिको को योग की शिक्षा देते दिखाई दिये। जुलाई, 2019 में उनका स्थानांतरण मध्य विद्यालय चैनपुर, भैंसमारा में किया गया। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के संचालन का भी दायित्व अखिलेश्वर पाठक को प्राप्त है। शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक प्रयोग एवं अद्भुत सूझबूझ का परिचय इन दोनों शिक्षकों ने दिया। इस वर्ष बिहार के इन दोनों शिक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।

– संजीव कुमार

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