पटना, 6 अप्रैल। भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के उपलक्ष्य में प्रांत के कई संगठनों ने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार प्रांत में लगभग 250 स्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर पथ संचलन निकाला गया। संघ के गणवेश में घोष के साथ पथ संचलन निकाला गया। आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक (प्रथम) डाॅ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती भी है। आज के दिन संघ के स्वयंसेवकों ने आद्य सरसंघचालक प्रणाम निवेदित कर पहले सरसंघचालक को श्रद्धांजलि अर्पित की। ज्ञात हो कि संघ की छः उत्सवों में वर्ष प्रतिपदा उत्सव भी है। संघ वर्ष प्रतिपदा और विजयादशमीं के दिन गणवेश में कार्यक्रम आयोजित कर पथ संचलन निकालता है। संघ के अलावा भी कई संगठनों ने भारतीय नववर्ष के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किये।

जन्मजात देशभक्त थे डॉ. हेडगेवार- रामदत्त चक्रधर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उनके मन में इस बात की कशक थी कि अपना देश गुलाम क्यों है। ऐेसे कई प्रसंग हैं जब उन्होंने छुटपन में ही अपनी देशभक्ति दिखलाई। महारानी विक्टोरिया के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मिठाई को फेंक देना, विद्यालय से ही सुरंग खोदकर यूनियन जैक को हटाने की योजना बनाना इत्यादि ऐसे कई प्रसंग उनके बचपन में आते हैं जब उनकी देशभक्ति दिखी। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर ने वैशाली में वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ साहब ने गरीब परिवार में जन्म लिया। डाॅक्टरी की शिक्षा पाई किंतु देश को अखंड स्वतंत्र बनाने के लिए एक दिन भी प्रैक्टिस नहीं की। लंबे समय तक चिंतन-मनन और कई ंसगठनों में कार्य करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्रांरभ किया। संघ का विकास क्रमिक रूप से होता चला गया। भारत हिन्दू राष्ट्र है, यह उद्घोषणा करते हुए उन्होंने छः उत्सवों की परंपरा शुरु की। वर्ष प्रतिपदा का उत्सव भारतीय जनमानस में नूतनता एवं भारतीयता का परिचायक है।

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