बांका। बिहार के बांका जिले के नवटोलिया स्थित नूरी मस्जिद के आगे मदरसे में मंगलवार को हुए बम विस्फोट में इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल किया गया। पुलिस और जांच टीम को ऐसा अंदेशा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इसी तरह का बम विस्फोट पश्चिम बंगाल के वद्र्धमान जिला स्थित खागरागढ़ में हुआ था। वहां दो संदिग्ध आतंकियों की मौत हो गई थी। बांका में हुआ विस्फोट उसी तरह का है। इसकी जांच के लिए आज गुरुवार को एनआइए की टीम आएगी।

मु. मोबीन का भी था बंगाल आना-जाना


वद्र्धमान की घटना में जमात-उल-मुजाहिदीन का हाथ था। यह बांग्लादेशी आतंकी संगठन है। इस घटना में मृत मौलाना मु. मोबीन का भी बंगाल आना-जाना था। मोबीन मूल रूप से झारखंड के देवघर जिला स्थित सारठ का रहने वाला था। विगत कुछ वर्षों से वह बांका में रहकर इमाम का काम करता था। हाल के दिनों में इसकी गतिविधि संदिग्ध थी। इस बार पांच मई से शुरू हुए लॉकडाउन के दौरान हाल तक उस मदरसे में संदिग्ध लोगों का आना-जाना जारी था।

Untitled-2 copy

मंगलवार को भी मौजूद थे संदिग्ध


मंगलवार को जिस दिन मदरसा में विस्फोट हुआ, उस दिन भी वहां संदिग्ध लोग मौजूद थे। ये लोग विस्फोट के बाद जख्मी अवस्था में भाग खड़े हुए। जानकार बताते हैं कि यहां संदिग्ध लोगों में बंगाल और झारखंड के भी लो आते-जाते थे। इनकी गाडिय़ां हर बार बदल जाती थीं। ये संदिग्ध मदरसा के आसपास के इलाकों में आने-जाने के लिए मोटरसाइकिलों का भी प्रयोग करते थे। स्थानीय लोगों की मानें तो मदरसे में पार्टियां भी आयोजित की जाती थीं। इन पार्टियों के लिए पैसे कहां से आते थे, यह जांच का विषय है। इधर, सूत्रों ने बताया कि मोबीन के तीन भाई और हैं। उसके पिता का नाम मु. अब्दुल सत्तार था। उसका घर सारठ के पास कालीजोत में था। बुधवार को उसके जनाजे को मिट्टी दी गई।

चार लोग लिए गए हिरासत में


इस घटना के बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए चार लोगों को हिरासत में लिया है। फिलहाल, पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से कोई खास जानकारी हासिल नहीं कर पाई है। पुलिस के पास इस बात की पक्की सूचना है कि घायलों का इलाज गोड्डा (झारखंड) में ग्रामीण चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। इन लोगों की गिरफ्तारी के लिए एसआइटी को टास्क दिया गया है। जब तक पुलिस की गिरफ्त में घायल नहीं आते हैं, तब तक इस घटना का पर्दाफाश नहीं हो सकता है।

maulana

मौलाना के संपर्क में एक दर्जन युवाओं की टोली


चर्चा है कि पल्सर से चलनेवाले मौलाना के संपर्क में एक दर्जन से अधिक युवाओं का संपर्क था। इस कारण मौत के सामान को सुरक्षित रखने के लिए मदरसा का सहारा लिया गया। स्थानीय कुछ लोगों ने बताया कि मौलाना द्वारा बम बनाने में तीन युवकों का सहारा लेता था। उसे भागलपुर के एक स्थान से बारुद मुहैया कराया जाता था। इस कारण छोटी-छोटी बात पर भी इस क्षेत्र में बमबाजी आम बात हो गई थी।

डीआइजी ने डीएम व एसपी के साथ गुप्त बैठक


बुधवार को इस घटना की जांच के लिए भागलपुर प्रक्षेत्र के डीआइजी सुजीत कुमार बांका पहुंचे थे। उन्होंने एसपी के कक्ष में डीएम और एसपी के साथ लगभग एक घंटे तक इस घटना को लेकर मंथन किया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। बुधवार को एटीएस की आठ सदस्यीय जांच टीम यहां पहुंची। गुरुवार को एनआइए की टीम भी जांच के लिए पहुंचेगी।

दूसरे राज्यों से होती थी फंडिंग


इमाम मोबीन ने दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल होकर प्रशिक्षण लिया था। पुलिस को इसके सुबूत मिले हैं। दूसरे प्रदेशों से भी फंडिंग मिलने की बात सामने आ रही है। जानकारी मिली है कि इमाम का 17 से 19 मई तक सुबह 11 से अपराह्न तीन बजे तक का अंतरजिला देवघर से चतरा का ई-पास कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम से बनाया गया था। उस पास का प्रयोग किस काम के लिए किया गया, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।

इतनी जल्दबाजी में यह बता पाना संभव नहीं है कि कैसे और क्या हुआ? जिसकी मौत हुई है, उसके बारे में भी और जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि विस्फोट की घटना के बाद आज आसपास लोग नहीं दिख रहे हैं। – सुजीत कुमार, डीआइजी, भागलपुर

श्रोत- जागरण

Leave a Reply

Your email address will not be published.