फैशन के दौर में भी दीयों की मांग बरकरार है। अगर दीये नये ढंग के हों तो उसकी मांग पूरे विश्व में हो सकती है। इसे सच साबित किया है बिहार के गोपालंगज जिलान्तर्गत बरौली प्रखंड के बखरौर गांव के दीयों ने। बखरौर में गाय के गोबर, मेंथी, ग्वार-गम और इमली के बीज के पाउडर से बने सुंदर दीये पूरे विश्व को अपनी ओर आकृष्ट कर रहे हैं। भारतीय सभ्यता और संस्कृति की झलक लिये इन दीयों की मांग वैश्विक है। विश्व की प्रमुख आॅनलाईन कंपनी अमेजन इन दीयों की खरीददारी कर रही है। इन दीयों की भारी मांग ने कंपनी को इस ओर आकृष्ट किया।
पहले एक दो कारीगरों ने इन दीयों का निर्माण किया। लेकिन, धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ती गई। अब सिर्फ एक कारोबार दिनेश पांडेय के यहां ही 10 मजदूर लगातार दीया निर्माण और उसके पैकिंग में लगे रहते हैं। एक दीया बनाने में 1.40 रूपये की लागत आती है। अमेजन इसे 4.45 रूपये में खरीदता है। पर्यावरणविद् इसे इको फ्रेंडली दीये बता रहे हैं। इस दीये के कारण मिट्टी की कटाई और उसकी बर्बादी भी नहीं हो रही है। ये दीये पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं। इन दीयों को खासियत है कि जबतक दीये में तेल रहेगा, दीये में आग नहीं पकड़ेगी। इन दीयों की एक और खासियत है कि इसके धुएं से मच्छर व अन्य कीट नहीं आते। इनमें मिट्टी की दीयों की अपेक्षा कम तेल की खपत होती है।

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