काशी (विसंके)। देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में मातृशक्तियों ने एक अनूठा इतिहास रचा. काशी के असि घाट पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से उपस्थित 1008 महिलाओं ने हाथ में दीपक लेकर शिव तांडव स्तोत्र का जाप किया. जब भारतीय परिधान में महिलाओं ने एक साथ शिव तांडव स्तोत्र प्रस्तुत किया तो बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी का पूरा वातावरण पवित्र मन्त्रों से गुंजायमान हो उठी. विश्व भर में आध्यात्मिक और सामाजिक संस्कारों के लिए वैचारिक अभियान चला रही महिलाओं ने सोमवार को शिव और शक्ति के एकाकार को दर्शाया.
फाउंडेशन फॉर होलिस्टिक डिप्लोमेटिक एडमिशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, हैदराबाद, भुनेश्वर समेत देश के विभिन्न राज्यों से महिलाओं ने प्रतिभाग किया. सुनहरे वस्त्र धारण की मातृशक्तियों ने के मुख से ‘ॐ’ की धरा प्रवाहित हुई तो लगा कि जैसे अंतरात्मा महाशून्य में विचरण कर रहा है और इस शून्य में शिव-शक्ति दोनों का ही तेज ओज समाहित है. घी के दीप लिए खड़ी और अध्यात्मिक आभा से दपदपाती मातृशक्तियों के स्वर में शिवताण्डव स्तोत्र के अमोघ मन्त्रों की गूंज व मृदंग तथा डमरू की ताल से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी गुंजायमान हो उठी.
अर्द्ध निमिलित नेत्रों में जैसे देवाधिदेव का रूद्र रूप उभरता चला जा रहा था. महिलाओं ने ‘शिव तांडव स्तोत्र’ पाठ के दौरान कोरोना गाइडलाइंस का पालन किया. इस खूबसूरत छठा को देखने के लिए भारी संख्या में लोग भी उपस्थित थे.

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