छपरा, 4 अप्रैल। जय प्रकाश विश्वविद्यालय में लम्बित परीक्षाओं के अविलम्ब संचालन की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रतिनिधि मंडल स्वास्थ्य मंत्री सह छपरा, सिवान के प्रभारी मंत्री मंगल पाण्डेय तथा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर० के० महाजन से मिलकर सम्मार पत्र सौंपा।

विद्यार्थी परिसद ने अपने मांग पत्र के माध्यम से कहा कि विश्वविद्यालय में अन्यान्य कारणों से स्नातक तृतीय खण्ड (सत्र2013-16), स्नातक द्वितीय खण्ड (सत्र2014-17), स्नातक प्रथम खण्ड (सत्र2015-18, 2016-19, 2017-20) की परीक्षाएं लम्बित है, जिसके कारण विश्वविद्यालय में लगातार अराजक स्थिति बनी रहती है। विश्वविद्यालय के जन सम्पर्क पदाधिकारी द्वारा 29मार्च2018 को 5 दिनों के अन्दर परीक्षा कार्यक्रम प्रकाशित करने का प्रसारण किया गया परन्तु कोई सुगबुगाहट नजर नही आ रही। परीक्षा कार्यक्रम जल्द प्रकाशित नही होने की स्थिति में और अराजकता व्याप्त होने की सम्भावना है।

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर० के० महाजन ने बताया कि अतिरिक्त नामांकन सम्बंधित सुझाव महाधिवक्ता से लेने के बाद सरकार द्वारा अनुमति पत्र तैयार हो चुका है जिसे आज विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दिया जाएगा।

विद्यार्थी परिषद के विश्वविद्यालय प्रमुख आशुतोष कुमार ने बताया कि लम्बित परीक्षाओं के संचालन को लेकर परिषद हमेशा संघर्षरत रही है अपने आंदोलनों, पहली बार चुनाव में जीते छात्रसंघ पदाधिकारियों के द्वारा परीक्षा न होने तक अपने कुर्सी पर नही बैठने का कठोर निर्णय, राज्य एवं केन्द्रीय मंत्रियों को लगातार ज्ञापन के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराने एवं विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगातार दबाव बनाने का काम करती रही है। जिसमें प्रदेश सह मंत्री लक्ष्मी कुमारी, विश्वविद्यालय संयोजक रितेश रंजन, छात्र संघ अध्यक्ष रजनीकान्त सिंह, उपाध्यक्ष विनय प्रकाश, महासचिव रंजीत कुमार, संयुक्त सचिव शशि कुमार पाण्डेय, कोषाध्यक्ष साहिल राज, विभाग प्रमुख अखिलेश मांझी, विभाग संयोजक मनोज गुप्ता, आकास कुमार, जिला संयोजक रवि पाण्डेय(छपरा), राहुल चौरसिया(सिवान), कौसिक कुमार(गोपालगंज), प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अंकित कुमार सिंह, वंसीधर कुमार, आकास मोदी, विशाल कुमार, नगर मंत्री प्रतीक कुमार, जिला छात्रा प्रमुख सुस्मिता कुमारी, नगर छात्रा प्रमुख शिवांगी कुमारी, प्रियंका कुमारी, अपराजिता कुमारी, ऋतु रश्मि, अपूर्व भारद्वाज, आदि की भूमिका प्रमुख रही है जिसके कारण छात्रहित में निर्णय लिया सका है।

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