कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद अब पूरे देश में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस लेने की चर्चा शुरू हो गई. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का गिलगित-बाल्तिस्तान चर्चा में बना हुआ है. गिलगित-बाल्तिस्तान पर अफवाहों को दूर करने और इसके इतिहास से लोगों को रुबरु कराने के लिए शनिवार को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन हॉल में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का आयोजन आद्य नारद स्मृति कार्यक्रम के दौरान किया गया. मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व आईएएस और नेहरू मेमोरियल म्यूजियम लाइब्रेरी, नई दिल्ली के निदेशक शक्ति सिन्हा उपस्थित रहे.
उन्होंने कहा कि गिलगित-बाल्तिस्तान अविभाजित डोगरा राज्य का 40 फीसद हिस्सा था. इसे अंग्रेजों ने 1935 में जम्मू-कश्मीर के राजा से 60 साल के लिए लीज पर लिया था. क्योंकि उन्हें डर था कि सोवियत यूनियन कहीं इस पर कब्जा न कर ले. पाकिस्तान का गिलगित-बाल्तिस्तान पर पिछले 70 वर्षों से अवैध कब्जा है. लेकिन पाकिस्तान अभी भी इसे अपना राज्य इसलिए नहीं कहता क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो उसका जम्मू-कश्मीर पर दावा खत्म हो जाएगा.

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विश्व संवाद केंद्र द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए तीन पत्रकारों को सम्मानित किया गया. वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्रनाथ भैया को देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान, अखिलेश चंद्रा को केशवराम भट्ट पत्रकारिता सम्मान तथा शशि शंकर को बाबूराव पटेल रचनाधर्मिता सम्मान दिया.
विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर के बिना भारत अधूरा है, उसी प्रकार गिलगित-बाल्तिस्तान के बिना जम्मू-कश्मीर अधूरा है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रय प्रचारक रामदत्त चक्रधर सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विश्व संवाद केंद्र की वार्षिक स्मारिका प्रत्यंचा का लोकार्पण भी किया गया.

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