देश में जब भी किसी हिंदू संत या साधु को लेकर मीडिया में बात उठती तो उन पर तरह-तरह के आक्षेप लगाए जाते हैं। कई बार मौलाना और पादरी को भी बाबा कहकर मीडिया में खबर को परोसा जाता है। लेकिन जब बात किसी पादरी या मौलवी की आती है तब मीडिया किसी भी तरह से उसे कठघरे में खड़ा करना मैं पूरी तरह असमर्थ होता है।
कुछ इसी तरह की स्थितियां वर्तमान में बनी हुई है। तमिलनाडु में ईसाई मजहब के प्रचारक पॉल दिनाकरन के कई ठिकानों में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी की गई है जिसमें उसकी 118 करोड रुपए की अवैध संपत्तियों का खुलासा हुआ है।
राज्य में चल रहे धर्मांतरण के खेल के पीछे कई बार पॉल दिनाकरन का नाम सामने आया है। अब जब इसके और इसकी संस्थाओं के खिलाफ बड़े रकम की धोखाधड़ी और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के अलावा टैक्स चोरी के आरोप लगे हैं तो किसी भी मुख्यधारा की मीडिया में इस पर चर्चा नहीं हो रही है।
आयकर विभाग ने ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के 25 ठिकानों पर छापेमारी की थी। चेन्नई और कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था जीसस कॉल्स से जुड़े 25 ठिकानों पर हुए इस छापेमारी में आयकर विभाग को कई ऐसे दस्तावेज और संपत्ति मिली है जो अवैध नजर आ रही है।
पॉल दिनाकरन इस क्रिश्चियन मशीनरी का प्रमुख है और इसका कामकाज भारत सहित कई गैर ईसाई देशों में फैला हुआ है। ये ईसाई प्रचारक कारुण्य विश्वविद्यालय का चांसलर भी है।
बीते शनिवार को छापेमारी खत्म हुई और इस छापेमारी में आयकर विभाग के लगभग 200 अधिकारी शामिल थे। छापेमारी में ईसाई धर्म प्रचारक पॉल दिनाकरन के संस्थाओं को विदेशी फंडिंग को लेकर भी जांच सामने आई है।
इसके अलावा छापेमारी में 4.5 किलो सोना भी मिला है जिसका कोई हिसाब किताब नहीं है। 120 करोड़ पर की ऐसी आए भी सामने आई है जिसका इस ईसाई धर्म प्रचारक के पास कोई दस्तावेज नहीं है और सोना भी इसके घर के अंदर से प्राप्त हुआ है।

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