पटना, 16 दिसंबर। पत्रकार स्वयं से संवाद करता है तभी वह आस-पास में घट रही घटनाओं को समाचार का रूप दे पाता है। घटनाओं को शब्द का रूप देने के लिए पत्रकार मन के अंदर संवेदना अनिवार्य है। आधुनिक बाजारवाद के दौर में भी पत्रकारिता एक पवित्र पेशे के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए है। शुक्रवार को विश्व संवाद केंद्र के ‘स्नेह मिलन’ कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उक्त विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि उपभोक्तावाद और बाजारवाद के दवाब में पत्रकारिता अपने धर्म से विमुख हो रही है। आये दिन पत्रकारिता में नैतिक पतन हो रहा है। इस पतन को रोकने के लिए एवं पत्रकारिता को उसकी आत्मा से जोड़े रखने के लिए यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी को सारोकार आधारित पत्रकारिता के कौशल से परिचित कराया जाए।
स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पूववर्ती छात्र-छात्राओं ने संस्था से जुड़े अपने अनुभव साझा किए एवं भविष्य होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में अपने सुझाव दिए। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्से से पूर्ववर्ती विद्यार्थी आये हुए थे। कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वांत रंजन जी थे। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं हिन्दुस्थान समाचार की राज्य प्रमुख (ैजंजम भ्मंक) श्रीमती रजनी शंकर, स्वत्व के संपादक श्री कृष्णकांत ओझा, देवेंद्र मिश्र, अफजल इंजीनियर इत्यादि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष श्री प्रकाश नारायण सिंह, दीघा के विधायक एवं संस्था के सचिव डाॅ. संजीव चैरसिया, न्यासी राजेश पांडेय, संस्कृतिकर्मी संजय सिन्हा, रा.स्व.संघ के क्षेत्र कार्यवाह डाॅ. मोहन सिंह, प्रेमनाथ पांडेय इत्यादि उपस्थित थे। मंच संचालन विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने किया।

By nwoow

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