स्वर माधुर्य कार्यशाला का दूसरा दिन

पटना, 21 मई। विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित स्वर माधुर्य कार्यशाला के दूसरे दिन डॉक्युमेंट्री निर्माता आर.बी. सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ध्वनि संबंधी कार्य में लगे कलाकारों एवं तकनीशियनों को ध्वनि यंत्र की समझ होनी चाहिए। अलग-अलग प्रयोजन हेतु भिन्न प्रकार के माइक तथा रिकॉर्डिंग उपकरणों की आवश्यकता होती है। किस तरह की ध्वनि को कौन से उपकरण का प्रयोग कर रिकॉर्ड किया जाना है यह विशिष्टता तकनीशियनों में होनी चाहिए। तभी ध्वनि में उच्च गुणवत्ता का समावेश होता है। उन्होंने एनेलॉग तथा डिजिटल युग के बीच में आये परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक में बदलाव के कारण व्हाइस आर्टिस्ट एवं तकनीशियन को आये परिवर्तन के अनुसार ढलना पड़ा। साउंड रिकॉर्डिंग की जो व्यवस्था आज हम देखते हैं वह बीस वर्ष पूर्व इससे बहुत भिन्न थी। साथ उन्होंने कहा कि फीचर फिल्मों, डॉक्युमेंट्री, समाचार, रेडियो कार्यक्रम, इवेंट के ध्वनि रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग मापदंड होते हैं। उस मापदंड को ध्यान में रखते हुए ध्वनि रिकॉर्ड किया जाना चाहिए।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में दूरदर्शन पटना के समाचार संपादक संजय कुमार ने समाचार क्षेत्र में स्वर माधुर्य की महत्ता बताते हुए कहा कि समाचार में किस वाक्य या शब्द पर जोर देना है यह स्वर माधुर्य की समझ से ही संभव है। उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि एक ही लिखित वाक्य को अलग-अलग आवाज में पढ़ने पर उसके अर्थ में भिन्नता आती है। उन्होंने कहा कि समाचार वाचक की ध्वनि सरल एवं स्पष्ट होनी चाहिए ताकि अधिकांश श्रोता समाचार को सुनकर उसके अर्थ समझ पाये।
अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए आकाशवाणी पटना के सहायक निदेशक डॉ किशोर सिन्हा ने कहा कि रेडियो माध्यम में आवाज की प्रधानता होती है। इसलिए इसमें लिखित शब्दों को आवाज के माध्यम से ही इस प्रकार संप्रेषित किया जाता है कि श्रोता के मन में बोले गए वाक्य का सटीक चित्रण हो। एक ही शब्द को अलग-अलग ढंग से उच्चारण करने पर उससे सूक्ष्म भिन्नता वाले अर्थ संप्रेषित होते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि विषय अथवा समाचार के भाव को समझ कर किसी शब्द विशष का उच्चारण किया जाय।
सत्र की समाप्ति पर विश्व संवाद केन्द्र के संपादक संजीव कुमार ने आये हुए विशेषज्ञों को धन्यवाद देते हुए कहा कि पत्रकारिता में नई पीढ़ी पत्रकारीय गुणों से लैश हो, इसके लिए आवश्यक है कि भावी पत्रकारों एवं विशेषज्ञों के बीच एक संपर्क स्थपित किया जाय। इस कार्य में यह कार्यशाला उपयोगी हो सकती है।

By nwoow

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