पटना, 13 नवंबर। पाटलिपुत्र सिने सोसायटी द्वारा सोमवार को एक दिवसीय फिल्म रसास्वादन कार्यशाला (फिल्म एप्रिसियशन वर्कशाॅप) का आयोजन किया गया। इंदौर के फिल्म एकेडेमिशियन राकेश मिŸाल ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। अपने संबोधन सत्र के दौरान उन्होंने दृश्य-श्रव्य माध्यम से फिल्म विधा की बारीकियों को समझाया। दुनिया की पहली फिल्म ’एराइवल आॅफ दी ट्रेन’, भारत की पहली फिल्म ’राजा हरिश्चंद्र’, मूक फिल्मों की क्लीपिंग, ऐतिहासिक फिल्मों के निर्माण के दौरान के क्लीपिंग, विश्व की महानतम फिल्मों के चुनिंदा दृश्य दिखाकर सिनेमा कला के इतिहास, कंपोजिशन, डिजाइन, सामाजिक पहलू, तकनीक, अर्थ आदि के संबंध में विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि फिल्म बनाना तो कौशल का विषय है ही, फिल्म देखने के लिए भी एक कौशल चाहिए। फिल्म देखने की तमीज जिसके अंदर विकसित हो जाएगी, वे स्मार्ट व्यूअर कहलाएंगे।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व सदस्य और फिल्म विश्लेषक रौशन जी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साध नही बल्कि समाज का दर्पण भी होता है। सिनेमा निर्माण की प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया जाना चाहिए क्योंकि यह अपने आप में बड़ी कला है। भारत में सबसे ज्यादा फिल्मों का निर्माण होता है। यह हमारे लिए गौरव का विषय है। अतः हमें फिल्मों के बारे में गंभीर अध्ययन करना चाहिए।
इससे पूर्व उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध फिल्मकार रीतेश परमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यशाला में कई भावी फिल्मकार भी आए हैं। उनसे कहना है कि यह बात मन से निकाल दें कि बिहार में रहकर फिल्में नहीं बन सकती हैं। बिहार में भी अच्छी फिल्म बन सकती है और फिल्म के लिए बिहार का माहौल भी काफी अच्छा है। बिहार सरकार के मान्यता प्राप्त फिल्म निर्माता अजीत चैधरी ने कहा कि आज तकनीक के समय में फिल्में बनाना आसान हुआ है, लेकिन गुणवत्ता को बनाए रखना अब भी चुनौती है। उन्होंने डाॅक्यूमेंटरी फिल्मों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वृत्त्चित्र का विशेष महत्व है। फीचर फिल्मों में जो तथ्य किन्ही कारण से नहीं दिखाए जा सकते हैं, उन्हें हम वृत्तचित्र के माध्यम से लोगों के बीच प्रस्तुत कर सकते हैं।
विश्व संवाद केन्द्र के संपादक संजीव कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि पाटलिपुत्र सिने सोसायटी बिहार में सिनेमा की स्वस्थ संस्कृति को बढ़ाने को लेकर शुरू से प्रतिबद्ध है। इस तरह के कार्यक्रम का नियमित आयोजन इसकी प्रतिबद्धता का परिचायक है। कार्यक्रम का मंच संचालन पाटलिपुत्र सिने सोसायटी के संयोजक प्रशांत रंजन ने किया। इस कार्यशाला में पटना के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं उपस्थित थें।

By nwoow

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