12 जनवरी, पटना। पत्रकारिता के पेशे में सम्मान के साथ-साथ जिम्मेदारी भी होती है। आज जब देश के राजनीतिक और सामाजिक तानेबाने में जीवन मूल्यों का पतन हो रहा है, ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। लेकिन, दुःख की बात है कि बाजार ने देश, समाज और पत्रकार को अपने प्रभाव में ले लिया है। इस संक्रमण से उबरकर लोक कल्याण का दायित्व पत्रकारों पर है। उक्त बातें पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजय पासवान ने शुक्रवार को कहीं। वे विश्व संवाद केंद्र द्वारा 12 दिवसीय पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकांत ओझा ने कहा कि पत्रकारिता कर्म अपने में एक नैतिक बोध को भी समाहित किए होता है। यही वह तत्व है जो मीडिया को मुनाफा वाले अन्य पेशेे से अलग करता है। अखबार या चैनल के लिए व्यावहारिक रूप से धन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि जनमत निर्माण और जनमत परिष्कार में मीडिया की भूमिका निष्पक्ष बनी रहे। इसके लिए पूर्वाग्रह से मुक्त होकर पत्रकारिता करना एकमात्र उपाय है।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह ने कहा विगत 15 वर्षों से यह संस्था मूल्य आधारित पत्रकारिता को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इसका एकमात्र ध्येय है कि ऐसे पत्रकार तैयार करना जो बाजार के दबाव के बावजूद देश और समाज के हितों को ध्यान रखकर पत्रकारिता कर्म करे।

By nwoow