केरल के हालात काफी चिंताजनक हैं। सीपीएम द्वारा जारी अनियंत्रित हिंसा में लगभग 3 हजार आम आदमी अपनी जान गवां चुके हैं। लगभग 2 हजार सुरक्षाबलों को भी अपने दायित्व का निर्वहन करते समय प्राण गवांने पड़े हैं। केरल में लगातार हो रहे हिंसा के खिलाफ देश के सभी जिला केन्द्रों पर 1 मार्च को विशाल धरना का आयोजन किया गया है। पटना में गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर 11 बजे से 2 बजे तक धरना दिया जायेगा।
पटना के विश्व संवाद केन्द्र में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रख्यात साहित्यकार डाॅ. शत्रुघ्न प्रसाद ने कहा कि केरल में हो रहे अमानवीय गतिविधियों की तरफ राष्ट्र का ध्यान दिलाना तथा सामान्य नागरिक की पीड़ा का स्वर देने के लिए यह धरना का आयोजन किया गया है। केरल के कन्नूर और तालचेरी में सर्वाधिक हिंसा की घटनाएं घटित होती है। वामदलों के विरोध करने वालों को चुन-चुन कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन के गांव पिरनाई में भी सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं है। इस गांव में अक्टूबर, 2016 में 26 वर्षीय रेमिथ की बुरी तरह मौत के घाट उतार दिया गया। यहीं 14 वर्ष पूर्व उनके पिता की भी हत्या वाम समर्थकों ने कर दी थी। सत्ता संपोषित हिंसा का इससे घृणित उदाहरण पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिल सकता। भगवान के अपने देश की संज्ञा से विभूषित केरल की हिंसा पूरी मानवता को शर्मसार कर देनेवाली है और सबसे आश्चर्यजनक मानवाधिकारवादियों की चुप्पी है। सरेशाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालयों में बम पटके जाते हैं। कार्यकर्ताओं को घरों से खींचकर चाकुओं से गोद दिया जाता है। 2016 में 400 एफआईआर वाम समर्थकों के खिलाफ दर्ज हुए लेकिन, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 26 जनवरी को नारूवामुलु तथा मट्टनऊर में सुरक्षाबलों के समाने ही बम धमाके किये गये लेकिन राज्य सरकार के इशारे पर हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। पत्रकार वार्ता में पूर्व सेनाधिकारी यशवंत कुमार भी उपस्थित थे।

By nwoow

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